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Rishta wahi

वो था मेरे जिंदगी का सबसे महत्त्वपूर्ण कीरदार आया, सबसे ज्यादा हक़ भी जताया और आँखों से ओझल हो गया कही किस पार मैं खुदको ढूँढती रही उसमे पर अफ़सोस हुआ जानकर की अब रहीं ना मैं कोई हक़दार मेरी कहानी का हिस्सा भी वही हर पन्ने पे जो छप गया वो क़िस्सा भी वही चाहकर भी अलग कर ना सकु ऐसा रिश्ता भी वही _निधि १४/०७/२०२३ रात १०:०२

नयी शुरुवात

अंकुर नाम मे ही अर्थ है अंकुर मतलब नयी शुरुवात हा मेरे जिंदगी की या यू कहू हमारे जिंदगी की पहली मुलकात आज भी बाकी हैं पर, तुमसे की पहली बात आज भी याद हैं पता नहीं कब कैसे किस घडी तुमने मेरे दिल मी अपने लिये जगह बना ली और मै मना भी नहीं कर पायी जानती भी नहीं कि तुम क्या महसूस करते हों मेरे लिये पर मैं ये जो तुम्हारे दस्तक देनें के बादसे महसूस करने लगी हूँ शायद शब्दों में नहीं कह पाऊँगी अगर आप चाहोगे और हम कभी मिले तो मेरी ख़ुशी मेरे आँखों में पढ़ लेना बात कम करती हूँ ये शिकायत है आपको मुझसे बस तुमसें बहुत कुछ कहने का मौक़ा ज़रूर देना शायद मेरे बिखरे हिस्सो को तुम समेट लोगे और अपने क़िस्सो में शामिल कर एक नयी कहानी की शुरुवात करेंगे अब इंतज़ार नहीं होगा मुझसे जल्दी ठीक हों जाओ आपको सुनना चाहती हूँ समझना चाहती हूँ आपको देखना चाहती हूँ महसूस करना चाहती हूँ अपना बनाना चाहती हूँ और आपकी होना चाहती हूँ __निधि १७/१०/२०२३ ११:१४

मैं हूँ

लगाये होंगे तुझे रंग हजारों ने, पर तुझसे कभी ना मिटने वाला रंग मैं हूँ.... मनायीं होगी तुमने खूब रौशनीवाली दिवाली, पर तेरे साथ हमेशा जलता जो रहा वो दिया मैं हूँ…. गुज़ार दिए होंगे कई हसीन पल, राते, कई महीनें और साल, जो काट ना सकोगे अकेले वो हसीन रात मैं हूँ…. की होगीं तुमने भी गुफ़्तगू कई बार, पर दिल को छू जाये वो बात मैं हूँ…. बिताये कितने दिन और बन गई कई कहानियाँ, पर जो भुला ना पाए तुम वो याद मैं हूँ…. तेरे मंज़िल पर तों सारा ज़माना तेरे साथ खड़ा था, पर मंज़िल तक लें जाए वों साथ मैं हूँ…. भीड़ में कभीं तनहा पाओगे खुदको, तब जो अपनापन महसूस कराये वो एहसास मैं हूँ…. ज़िंदगी में आयेंगे हज़ारो तूफ़ान, तेरे अंदर के सैलाब कों शांत करानेवाली शांति मैं हूँ…. जुदा करने कि हर वो कोशिश की ख़ुदा ने, पर दरियाँ से ज़ो मिल जाये वों सरिता मैं हूँ…. दूर चला गया तू मुझसे कई दफ़ा, हर बार लौटने की उम्मीद सें किया गया इंतज़ार मैं हूँ…. गलतफहमी कभी गलती से आ भी जाये अगर, बावजूद उसके सागर से जो मिल जाये वो साहिल मैं हूँ…. चाहकर कभीं चुप रहना पड़ा किसी पल मैं, तेरे कलम की स्याहीं सें जो निकले वो ...

मेरा हिस्सा बना ही नहीं

वो था मेरे जिंदगी का सबसे महत्त्वपूर्ण कीरदार आया, सबसे ज्यादा हक़ भी जताया और आँखों से ओझल हो गया कही किस पार मैं खुदको ढूँढती रही उसमे पर अफ़सोस हुआ जानकर की अब रहीं ना मैं कोई हक़दार मेरी कहानी का हिस्सा भी वही हर पन्ने पे जो छप गया वो क़िस्सा भी वही चाहकर भी अलग कर ना सकु ऐसा रिश्ता भी वही मेरा हिस्सा होकर भी वो शख़्स मेरे हिस्सा बना ही नहीं _निधि १४/०७/२०२३ रात १०:०२

तोहफा

हमने उन्हे तोहफ़े में, अपना अपना अच्छा वक्त दे दिया उस तोहफ़े ने उनका वक्त ही बदल दिया तोहफ़े में मिले अच्छे वक्त में वो कुछ इस तरह गुम हो गए की अब उनके पास हमारे लिए देने के लिए वक्त ही ना रहा... अच्छे वक्त को संभाल के रखिए... तोहफ़े में भी न दे क्या पता कल यही वक्त आपके लिए बुरे वक्त का तोहफ़ा लेकर आए। _निधि १ जून २०२२

अलविदा!!!

आज फिर उनसे बात हुई, मगर इस बार एक दोस्त बनकर नहीं... बस अजनबी बनकर.. थोड़ा बुरा लगा!! इस तरह खुदको झुठलाकर.. पर मजबूर भी उन्ही ने किया था.. मैं "कैसे हो" कहकर रूक गई, जवाब में "ठीक नहीं हूं!!" सुनकर दिलसे दुख हुआ.. पर बात को अनसुना कर बात को खत्म कर दिया.. सच कहूं तो उसने जो नही कहा, वह भी सुन लिया था मैंने.. क्यूकी, में उसकी रूह को पहचानती हूं.. वो चाहे या ना चाहे मुझे, माने या ना माने, पास रहे या दूर, फिर भी उसको सुन सकती हूं, महसूस कर सकती हूं... उसके दुखी होने पर मेरा दिल आज भी रोता है.. उसे खुश देखकर में भी खिलखिलाती हूं.. न जाने कोन हूं मैं उसकी??? पर कुछ हूं जरूर!! तभी तो, आपने आने की खबर दे चुका था... पर मजबूरियों के कटघरे में खड़ा भी वही कर कर गया.. बुलाकर भी नही बुलाना समझ गई थी में.. मैंने भी खबर जानकर, मिलूंगी दिखाया, पर मिली नही... क्यूकी, उसकी खुशी इसी में थी!! और मेरी उसमे!! न जाने और कितने अलविदा कहने पड़ेंगे?? बस उसकी खुशी के लिए... न जाने और कितने बार मरकर भी जीना पड़ेगा?? बस उसकी हसी के लिए... _निधि ६ जून २०२२

उलझन

जिंदगी के उस मोड़ पे हूं जहां मैं सबके साथ होकर भी कभी कभी अकेला महसूस करती हूं अपनो को सहारा देते देते खुद सहारा ढूंढना जैसे भूल ही गई हूं कभी रोने का मन होकर भी हसीं के पीछे छिपाती हूं कभी बेवजह ही खुदपे गुस्सा आता है जिंदगी क्या मोड़ लेगी ये सोचके आजकल डर लगता है इन दिनों बोहोत अजनबियों से मिलने का मौका मिला मिलकर लगा की जिंदगी इतनी भी बुरी नहीं है ये सच को अपनाने ही वाली थी की किसी ने मेरा दरवाजा खटखटाया मैंने भी सावधानी से झांक कर देखा देखा तो क्या था _ पुराने अच्छे पलो की कुछ बुरी यादें में समझ ही नहीं पायी क्या करू यादें बुरी जरूर है , पर पल तो हसीन थे उन्हें आंचल में समेट कर रखूं या फिर लौट जाने को कहूं मेरी बात मानेंगे क्या ?? ये भी सवाल था मन में और जो आज मेरे सामने है जिस आज में कुछ पल के लिए ही सही पर खुश हूं उसको कहा जगह दू मौका दू भी या नहीं या फिर से वही कहानी दोहरायी जायेगी क्या जिंदगी फिर वही मोड़ लेगी अजीबसी उलझन है _निधि २७/०५/२०२२

संयोग

तुमने कहा था  मुझे तुमसे कोई और अच्छा मिलेगा तुम मेरे लायक नही हो मैं कभी मानती नही थी ना ही अब मानती हूं तुमसे अच्छा तो नही चाहिए था कभी भी पर इतना जरूर मालूम है की अब तुमसा कोई नही चाहिए अब जो मेरे जिंदगी में दस्तक दे रहा है मैं भी अपने कदम उसकी ओर बढ़ाना चाहती हूं और यह मेरी मजबूरी नहीं है मैं दिलसे उसकी ओर आगे बढ़ना चाहती हू क्यूकी तुमने जहा मेरा साथ निभाना छोड़ दिया उस राह पर उसने मेरा हाथ थामा है जहा में बिखर गई वहां उसने मुझे समेटा है जहा तुम्हे कमियां और खामियां नजर आई मुझमें उसने वही मुझे  उन खामियों के साथ स्वीकारा है क्युकी  वो मुझे समझता है वो अनजान होकर मुझे अपना मानता है और तुम जानकर भी अनजान बन गए जिंदगी भर साथ निभाना पढ़ाई करने और पैसे कमाने जितना आसान भी नहीं है हर चीज दिमाग से खरीदने के लिए नहीं होती रिश्ते जोड़ने पड़ते है और उन्हें निभाया जाता है ख़ैर तुमसे ये बात भी करना  गलत है पर तुम्हे बताते हुए खुशी हो रही है की अब मुझे तुम्हारी याद नही आती में तुम्हारा इंतजार भी नही करती क्योंकि मेरे इंतजार में अब कोई और आने लगा है अब में पहलेसे ज्यादा खुश रह...

हार- जीत

जिनके साथ कभी कोई लढ़ाई नही करनी चाही वो लोग आज मुझे हराने में लगे है वो हर प्रयास कर रहे हैं मुझे मुझसे ही हराने का उनको ये बता दू की अपना कीमती वक्त ज़ाया ना करे किसी की पराजय में खुद की जीत खोजना  खुद अपने आप में सबसे बड़ी हार हैं मुझे खुशी है कि मेरी हार से ही सही किसीको खुशी तो मिली मैंने खुद ही अपने कदम पिछे लिए है उस लड़ाई से, जो जंग न कभी मैंने छेड़ी थी ना कभी जितने का सपना देखा अपनो को हराकर जितने वालो में से नही हूं मैं मैं हूं मेरा अस्तित्व है था और रहेगा उसे मिटाने की उसे बदलकर कुछ और रूप देनेकी या उसे कमज़ोर करने की कोशिश ना करे यदि आप मेरे अस्तित्व को अपने जिंदगी से नही मिटा पा रहे तो यह प्रयास विफल होगा  अगर आप सोचते है की मुझे ही मिटाने से आपको सफलता मिलेगी जरा सोचिएगा ज़रूर _निधि

Thoughtful but Powerful

Let them make assumptions. Let them assume you are old school. let them laugh when you say you are a day person. Let them think you have an attitude problem. Let them feel you cannot match the trending lifestyles. Let them assume you are just earning not making money. Let them think they are chilling out and you are just passing your days. Let the assumption continues that they are visiting places that are happening and you are visiting temple. Let them show off to their fullest you keep them thinking that you are mad with sadness. Because people only can assume. They only see what you show them. It's always better to keep your life personal from those who are judgmental. They are Judging your life, body, appearance, money, lifestyle, thinking, career, ambitions, family and what not. They are not living your life so they won't either understand. Those who believe you, will never comment on someone. But those who live a photographic  life will always be ready to poke there nose ...

मेरी कलम से

कुछ लोग हमारी जिंदगी में एक समय लेकर आते हैं खुशी का या गम का समय की सीमा पूरी होते ही अलविदा कह जाते हैं कभी हमें पूरा करके कभी अकेला करके या फिर कभी अधूरा छोड़ कर... _निधि

घर

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किती स्वप्न असतात न आपलं स्वतःचं घर असावं तसच तुम्ही पण बघितली असतील न स्वप्न ती पूर्ण पण केलीत तुमचा मेहनतीने जिद्दीने आज तोच घर आम्हाला असरा देतोय तुम्ही करतात तशी माया करतोय तुम्ही ठेवत होतात तशी सुखरूप असण्याची जाणीव करून देतोय किती आवडीने रंग बदलली या घराची मी लहानाची मोठे झाले इथे आपले सगळे सुख दुःख याच घरा ने बघितले मी कधीच कल्पना केली नव्हती तुमचा वीणा मला इथ राहावं लागेल मला आठवतंय मी सुट्टी घेऊन परत आले होते आणि तुम्ही घराला तुमचा मताप्रमाणे सजवत होता रंग दिले, काही बदल ही केलेत सगळ्या सोयी नीट केल्या जणू जाणवत होत तुम्हाला की तुम्ही गेल्यावर हे सगळ मला अवघड होईल आणि झालं ही पण मी पण तुमची लेक आहे या घराचं घरपण मी कधीच हरवू दिलं नाही आजही तुम्ही या घरात जिवंत असल्याची जाणीव होते तुमचे हास्य अजूनही आहे तुमचे शब्द या भिंतींनी आपल्यात सामावलेले आहेत आपल्या गोड आठवणी आहेत तुम्ही सोडून गेलात तसाच ठेवलंय सगळ नीट नेटकं बरं का तसच आहे सगळ अस वाटतं तुम्ही येणार बघायला या जमत असेल तर रंग तसाच आहे अजून तुम्ही करून गेलात तसाच आपली बाग पण बहरलेली आहे पण तुम्हीच हरवलात कुठे तरी... कुठ...

पितृ दिन

एक दिवस अचानक माझे बाबा गेले कुठलीच मनाची तयारी नसतांना, ना आजाराचा सांगावा, ना शरीर जीर्ण झाल्याचे संकेत तरीही... ते गेलेत.. आई रडली, बहिण ओरडली 'जग सारं संपलं' म्हणाली आणि म्हणाली, ‘वाचा बंद झाली कान बहिरे झालेत, नजर गेली सर्व सर्व संपलं....’ नंतर शांत होऊन झोपली. कारण ती ओरडली, रडली व्यक्त झाली परत मला जाणीव झाली अचानक माझे बाबा गेले... बहिणीचे शुष्क डोळे आमच्या पाठीशी कायमची झालेली पोकळी भविष्याचे विस्कटलेले धागेदोरे हो, हा गुंता सोडवण्यात मी हरवली मी रडली नाही, ओरडली नाही बाबा अजून स्मशानात जळायचाच होता पण, एव्हाना जग बदललं होतं आमचं अनाथपण घालवायला डोक्यावरून हात फिरवायला कुणीच नव्हतं... होते ते फक्त अनाथपण आपण किती एकटे असतो हे सत्य सांगणारं मरण आणि बापासोबत माझ्यातला हळवेपणा जाळणारं सरन अखेर... रात्री मी ही झोपली आई, बहिण झोपली पण एवढ्या रजईतही आम्ही थरथरत होतो का??? का???? आमचं पांघरूण हरवलं होतं... आमची बाप नावाची रजई जळाली होती.. असच अचानक माझे बाबा गेले आम्हाला अनाथ करून गेले... वर्ष पूर्ण झालं प्रत्येक क्...

बाबांचं प्रेम

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बाबा तुमच्या प्रेमाची सर कशालाच येत नाही, आयुष्यात तुमची जागा कुणीच घेत नाही. विचार येतात मनात सतत आज तुम्ही असतास तर कसं असतं, अस असतं , तसही असतं, सारं कसं ना सोप्पं असतं. मनात आलेती गोष्ट लगेच मी तुम्हाला बोलले असती. माझा मनातली घालमेल तुम्हाला सुद्धा बघवली नसती. निस्वार्थ प्रेम असतं, खरीखुरी काळजी असती. न सांगता सुखं दुःख माझी फक्त तुम्हालाच कळाली असती. इतरांसारखी मी ही मनमुराद स्वप्न बघितली असती. ती पूर्णत्वास नेण्यासाठी तुमची हिम्मत पाठीशी असती. मी ही माझा यशाने तुमच आयुष्य आनंदमयी केलं असतं. तुम्ही निवृत्त झाल्यावर मी माझे मोठे झाले असते. तुम्हाला सोडून खंबीर होण्याचे दिवस आले नसते. विसवाच्या काळात आता माझाबरोबर राहायचं असा हट्ट धरला असता. तुमच्याशी संवाद थट्टा करत आपला वेळ सरला असता. तुम्ही असता तर मी लहानाचे मोठे झालेच नसते. तुम्च्याविणा जबाबदाऱ्या सांभाळण्याची वेळ आली नसती. तुमचा लेकीला घालून बोलायची कुणाची हिंमत झाली नसती. सारं केलं तरी नाही केल्याची जाणीव कुणी करून दिली नसती. ना जगण्याची भीती असती ना जगाची धास्ती असती. आता साऱ्यांना कसं बोलायला...

२०२०- काळा वर्ष

2020 माझा आयुष्यातील काळा वर्ष या वर्षांतील एक ही दिवस मी सुखाचे पाहिले नाहीत आनंदाची भीती वाटायला लागली आहे या काळाने माझा आयुष्यातील माझी सगळ्यात जवळची व्यक्ती हेराऊन घेतली माझा जिवलग असलेल्या सर्वांना मझापासून हेरावल एका पाठोपाठ एक संकटे कोसळत गेली त्या संकटाना सामोरे जात मी आनंदी रहायचेच विसरले एक ही क्षण विसावा नको की शांती नको अश्रू गळायला वेळ सुद्धा नशिबी नाही दुःख सांगावस वाटत, पण वाटून घ्यायला सोबत कुणीच नाही आयुष्याच्या परीक्षे चा काळात मी एकटी पडलीय मदतीचं हाक मारायला म्हणून जवळचं कुणी दिसत नाही मुखोट्यांची धास्ती बसलीय कुणावर विश्वास ठेवायचा कळेनासं झालंय दगा करणारे शेकडो आहेत मदतीला धावणारे कमीच संधीच सोण करणारे तर त्याहूनही अधिक धीट होतेच... पण परिस्थितीमुळे आणखी धीट झाले मातीचा गोळा होते...बाबांनी साकारल.. नी घडवलं त्यांना जसं घडवायचं त्यांचीच सावली बनुन राहिले काळाने मात्र मातीचा दगड केलाय भावना हीन झाले... आता बाकीचे दुःख शुल्लक वाटतात स्वतः ला दुनियेचा काळ या नाझरेवाचून सुखरूप ठेवायचे शिकले शरीराची दमछाक झाली तरी कामे पूर्णत्वाला न्यायाचे समजले प्रेमाने वागून चालणा...

बाबा

एक दिवस अचानक माझा बाबा मेला कुठलीच मनाची तयारी नसतांना, ना आजाराचा सांगावा, ना शरीर जीर्ण झाल्याचे संकेत तरीही... तो गेला.. आई रडली, बहिण ओरडली 'जग सारं संपलं' म्हणाली आणि म्हणाली, ‘वाचा बंद झाली कान बहिरे झालेत, नजर गेली सर्व सर्व संपलं....’ नंतर शांत होऊन झोपली. कारण ती ओरडली, रडली व्यक्त झाली परत मला जाणीव झाली अचानक माझा बाबा मेला... बहिणीचे शुष्क डोळे तिच्या पाठीशी कायमची झालेली पोकळी तिच्या भविष्याचे विस्कटलेले धागेदोरे हो, हा गुंता सोडवण्यात मी हरवली मी रडली नाही, ओरडली नाही बाबा अजून स्मशानात जळायचाच होता पण, एव्हाना जग बदललं होतं आमचं अनाथपण घालवायला डोक्यावरून हात फिरवायला कुणीच नव्हतं... होते ते फक्त अनाथपण आपण किती एकटे असतो हे सत्य सांगणारं मरण आणि बापासोबत माझ्यातला हळवेपणा जाळणारं सरन अखेर... रात्री मी ही झोपली आई, बहिण झोपली पण एवढ्या रजईतही आम्ही थरथरत होतो का??? का???? आमचं पांघरूण हरवलं होतं... आमची बाप नावाची रजई जळाली होती.. असाच अचानक माझा बाबा मेला आम्हाला अनाथ करून गेला... #संकलित माझा परिस्थितिशी मेळ खाणारी कविता 😢😢😢😢

अबोल मनातले

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  कितीतरी बोलायचं राहुनी गेलं ओठांवर येऊनही ओठात राहिलं कितीतरी स्वप्ने राहुनी गेली माझ्यापासून दूर जणू माझी सावली गेली कितीतरी इच्छा मरुनी गेल्या उरल्या त्या अपेक्षाही  माझा  निसटून गेल्या आपले म्हणून जवळ कुणीच नाही राहिले आयुष्याचा चौकटीत मी मला एकटीच पाहिले वारंवार अविश्र्वासाच्या नवीन जखमा दिल्या मनातील जुन्या आठवणी उसवल्या गेल्या प्रेमाने जवळ करून त्याला मी  स्वतःच हरपून बसले होते ते चांगले दिवस ही आज माझावर रुसले पाठ फेरून माझ्यापासून बदललेली त्याची वाट अश्रूंनी ओल्या पापण्यानी उघडते माझी पहाट माझ्यावर ओसळला दुष्काळ तरी त्याने भरभरून बहराव आयुष्याचा वेलीवर त्याचा पदरी सुखद फुलांच सतत पाऊस पडावं व्याकुळ नेहमीच असेन मी परत त्याचा भेटीची कधीच तुलना होणार नाही कुणाशीच त्याच्या प्रितीची वाटायचं मला , त्यानी वाटेत हाथ माझं धरावं दोघांनी मिळून यशाची शिखर गाठावं सुख असो वा दुःख मिळुनी सामोरं जावं एकमेकांच्या सहवासात आयुष्य  हे जगावं परंतू आयुष्य हे नेहमीच सुखद आणि सोपं नसत ज्याची साथ जितकी त्यातच सुख मानायच असत निघून गेला जरी तरी हृदयात होणार  नेह...

Ek rishta hi tha tut gaya

 ek khushi thi jo ruth gai ek vishwas tha jo uth gaya ek rishta hi tha jo tut gaya ek dil hi toh tha jo tut gaya ek sath tha tera  jo chut gaya ek rishta hi tha jo tut gaya ek sach hi tha jo jhoot hua ek apna hi tha ..paraya bnkr ruth gaya ek rishta hi tha jo tut gaya ek dor hi thi bndhi jo chut gai ek sapna hi tha wo bhi tut gaya sabse pyara  rishta  tha  mera jo tut gaya ek dariya tha mohabbat ka beh  gaya ek mehal tha apno ka deh gaya mera fil hi toh tha bewafayi seh hi gaya _Nidhi$

Lost my important two

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Lost my important two one is gone to heaven one i lost in people's zoo i lost this 2020 match i lost my strength ,l lost my love i lost everything, i lost  the precious that I owe i lost my hero i have in my plate just a big zero i lost my roots because of which i was blooming i am still looking for the lost  soul to  try resuming i was dreaming of relating my love and my life i never thought of they will leave this soon to let  me alone strive both were my love,my  life and my pride now i have to listen to social rife and go on single ride i lost my first love ,i lost the last one too difference is just that one is gone to heaven & one i lost in people's zoo _NIDHI$

पापा, आपकी बहुत याद आती है

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पापा मेरे ज़िन्दगी का सबसे  अहम हिस्सा आपके बिना अधूरा है हर पहलू, हर किस्सा सबसे लाडली बनके आपके घर ये नन्ही परी आई आपकी प्रेम की छाया में मेंने आपसी छवि पाई मेरे दुख आधे कर खुशियां दोगुनी की मुझे बड़ा करने में कोई कसर नहीं रखी मेरे सबसे अच्छे दोस्त बने  किया है मेरे  हर सपने को पूरा वादा करती हूं रखूंगी नहीं आपकी कोई इच्छा को अधूरा कभी जताया नहीं आपने पर आपके गहरे स्नेह का है मुझे अहसास दूर जाकर भी मुझसे, आप अब भी हो मेरे पास जाते जाते भी बहुत कुछ है आपने सिखाया आज भी मैंने हर क़दम पर आपको अपने साथ ही है पाया में कभी कह नहीं पायी...आपसे कहने ही थी आयी की ज़िंदगी के इस मोड़ पर आपको आपने साथ खड़ा चाहती हूं में आप की परी हूं आप के दिए पंखों से ऊंची उड़ान भरना चाहती हूं आपसे अपने दिल की बातें सांझा करती थी और करना चाहती हूं अब में बड़ी हो गई हूं ..आपके भार को बांटना चाहती  हूं आपसे बहुत कुछ कहना चाहती हूं रह गई सारे बाते अनकही अब किससे कहूं किसे बताऊं की में क्या चाहती हूं किससे कहूं मन की बात याद है मुझे कैसे हम दोनों मिलकर मां को तंग किया...