मैं हूँ
लगाये होंगे तुझे रंग हजारों ने,
पर तुझसे कभी ना मिटने वाला रंग मैं हूँ....
मनायीं होगी तुमने खूब रौशनीवाली दिवाली,
पर तेरे साथ हमेशा जलता जो रहा वो दिया मैं हूँ….
गुज़ार दिए होंगे कई हसीन पल, राते, कई महीनें और साल,
जो काट ना सकोगे अकेले वो हसीन रात मैं हूँ….
की होगीं तुमने भी गुफ़्तगू कई बार,
पर दिल को छू जाये वो बात मैं हूँ….
बिताये कितने दिन और बन गई कई कहानियाँ,
पर जो भुला ना पाए तुम वो याद मैं हूँ….
तेरे मंज़िल पर तों सारा ज़माना तेरे साथ खड़ा था,
पर मंज़िल तक लें जाए वों साथ मैं हूँ….
भीड़ में कभीं तनहा पाओगे खुदको,
तब जो अपनापन महसूस कराये वो एहसास मैं हूँ….
ज़िंदगी में आयेंगे हज़ारो तूफ़ान,
तेरे अंदर के सैलाब कों शांत करानेवाली शांति मैं हूँ….
जुदा करने कि हर वो कोशिश की ख़ुदा ने,
पर दरियाँ से ज़ो मिल जाये वों सरिता मैं हूँ….
दूर चला गया तू मुझसे कई दफ़ा,
हर बार लौटने की उम्मीद सें किया गया इंतज़ार मैं हूँ….
गलतफहमी कभी गलती से आ भी जाये अगर,
बावजूद उसके सागर से जो मिल जाये वो साहिल मैं हूँ….
चाहकर कभीं चुप रहना पड़ा किसी पल मैं,
तेरे कलम की स्याहीं सें जो निकले वो कविता मैं हूँ….
मुश्किलें आयेंगी रस्ते में बहुत,
पार कर आग़े बढ़ जाये वों सफ़र मैं हूँ….
टूट कर भी बिखेर दिया अगर ज़िंदगी ने कभीं,
तुझको जो समेट लूँ , वो प्यार मैं हूँ….
मिलों दूर फ़ासले क्यों न हों हमारे बीच,
फ़ासले तय कर जाये वों प्यारा हमसफ़र मैं हूँ….
-निधि १६/ ०९/ २०२२
Comments
Post a Comment