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मै तेरी राधा कहलाऊंगी

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लाख गोपियां इर्द गिर्द मंडराए तेरे पर कान्हा तो बस राधा संग प्रीत निभाए राधा को ना भय है किसिका वो तो दिलसे प्रेम निभाए ना बांध सके गठबंधन में  एकदुजे को राधा और श्याम आज भी कान्हा संग जुड़ता है  राधा एक तेरा ही नाम मशहूर है तेरे प्रेम की गाथा छल कपट ना दुजाभाव सिखाता प्रेम ही नहीं दोस्ती तेरी अनोखी मेरे मुरलीमनोहर केवल राधा के श्याम ही नहीं, हो बलराम की दोस्ती की धरोहर माता देवकी के सुपुत्र हो , कहलाए यशोदा के नन्दलाल मीठी अठकेलिया खूब तेरी खेले कान्हा संग ब्रिज के ग्वाल कलयुग में भी तेरे रूप अनेक कान्हा हमने देखे है रास रचाए गोपियों संग प्रीत राधा को लेके है कान्हा सा रूप निराला तेरा,गोपियों को खूब रिझाए मीरा गाए गीत तेरे ,कान्हा राधा के संग मुस्काए ना बंधन में बंध पाऊ फिर भी मैं गीत तेरे ही गाऊंगी गोपियां आनी जानी है तू श्याम है मेरा, मै ही तेरी राधा कहलाऊंगी _निधि

Tomorrow!!

waiting for tomorrow someone has said tomorrow will never come... he make me realize this saying tomorrow i'll call but he never does because tomorrow will never come... it has become today now and he is busy in "his today" and i am still waiting for "our tomorrow" denying the fact that tomorrow will never come... but part of is also frightened of if tomorrow will come  which dreams for the other tomorrow then  i have to accept that  tomorrow will never come... my mind is convinced but my heart has not yet given up A constant battel is going on within me I am continuously struggling with this fact to change this firm belief "Tomorrow will never come..." into a complete truth "Tomorrow will come, just believe" The world is against me ; trying to entreat  me to swallow this bitter pill but i believe him , i believe his words and i believe tomorrow will come and yes surely one day it will come my better tomorrow will come...

दोस्त

दोस्त और दोस्तो की दोस्ती शब्दों से परे है ज़िन्दगी  की हर राह पर ये यार ही तो है जो खरे है लाख गीले शिकवे हो आपस में भले ही कोई पत्थर उछाले यार पे,ये दोस्त उछालनेवाले के लिए सबसे बुरे है चाहे दूर हो या पास हर लम्हे में इनके होने का एहसास दुख में दुखी तो सुख में मिठास ऐसे दो रत्न मेरे भी है हम बिछड़ गए थे फिर मिलने के लिए पर आज  मिलो दूर हमारे सवेरे है ऐसे कुछ खास दोस्त मेरे भी है बचपन के वो मासूम दोस्त और खट्टी मीठी शरारतें आज भी मेरे आने की खबर मिलते ही मेरी राह निहारते फूलो सी कोमल पहली दोस्त को पाया आज तक हर कदम जिसने साथ निभाया जीत ना सके जिसे नाम है जय दोस्ती निभाए बिल्कुल जैसे सुर ताल और लय है एक दोस्त सूर्यकांत  नवाब दुनिया घूमने में नहीं है इनका जवाब बच्चो से चंचल पूर्व की प्राची हमारी बच्ची विख्यात है जगत में दोस्तो कि सच्ची आती है बारी जो नहीं कभी है हारी संभाला जिसने हमेशा नाम है पुजा अब मैं तेरी मुसीबत हूंऔर कोई न दूजा मोहोर लगाई दोस्ती पे अपने नाम की ऐसी अंकिता दोस्ती के तुकबंदी की चोटी सी कविता। तुकबंदी से ना जोड़ पाई है कुछ ऐस...