संयोग
तुमने कहा था
मुझे तुमसे कोई और अच्छा मिलेगा
तुम मेरे लायक नही हो
मैं कभी मानती नही थी
ना ही अब मानती हूं
तुमसे अच्छा तो नही चाहिए था कभी भी
पर इतना जरूर मालूम है की अब तुमसा कोई नही चाहिए
अब जो मेरे जिंदगी में दस्तक दे रहा है
मैं भी अपने कदम उसकी ओर बढ़ाना चाहती हूं
और यह मेरी मजबूरी नहीं है
मैं दिलसे उसकी ओर आगे बढ़ना चाहती हू
क्यूकी
तुमने जहा मेरा साथ निभाना छोड़ दिया
उस राह पर उसने मेरा हाथ थामा है
जहा में बिखर गई
वहां उसने मुझे समेटा है
जहा तुम्हे कमियां और खामियां नजर आई मुझमें
उसने वही मुझे उन खामियों के साथ स्वीकारा है
क्युकी
वो मुझे समझता है
वो अनजान होकर मुझे अपना मानता है
और तुम जानकर भी अनजान बन गए
जिंदगी भर साथ निभाना पढ़ाई करने और पैसे कमाने जितना आसान भी नहीं है
हर चीज दिमाग से खरीदने के लिए नहीं होती
रिश्ते जोड़ने पड़ते है और उन्हें निभाया जाता है
ख़ैर तुमसे ये बात भी करना गलत है
पर तुम्हे बताते हुए खुशी हो रही है की
अब मुझे तुम्हारी याद नही आती
में तुम्हारा इंतजार भी नही करती
क्योंकि मेरे इंतजार में अब कोई और आने लगा है
अब में पहलेसे ज्यादा खुश रहने लगी हूं
मेरी हसी लौटाने वाला अब जिंदगी में दस्तक दे चुका है
शायद अब मुझे भी तुम्हारी कमी महसूस नहीं होती
या यूं कहूं तुम्हारे शब्दों में, मुझे तुम्हारी जरूरत नहीं
जैसे तुम्हे कभी भी मेरी नही थी
_निधि
१७/०४/२०२२
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