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मैं हूँ

लगाये होंगे तुझे रंग हजारों ने, पर तुझसे कभी ना मिटने वाला रंग मैं हूँ.... मनायीं होगी तुमने खूब रौशनीवाली दिवाली, पर तेरे साथ हमेशा जलता जो रहा वो दिया मैं हूँ…. गुज़ार दिए होंगे कई हसीन पल, राते, कई महीनें और साल, जो काट ना सकोगे अकेले वो हसीन रात मैं हूँ…. की होगीं तुमने भी गुफ़्तगू कई बार, पर दिल को छू जाये वो बात मैं हूँ…. बिताये कितने दिन और बन गई कई कहानियाँ, पर जो भुला ना पाए तुम वो याद मैं हूँ…. तेरे मंज़िल पर तों सारा ज़माना तेरे साथ खड़ा था, पर मंज़िल तक लें जाए वों साथ मैं हूँ…. भीड़ में कभीं तनहा पाओगे खुदको, तब जो अपनापन महसूस कराये वो एहसास मैं हूँ…. ज़िंदगी में आयेंगे हज़ारो तूफ़ान, तेरे अंदर के सैलाब कों शांत करानेवाली शांति मैं हूँ…. जुदा करने कि हर वो कोशिश की ख़ुदा ने, पर दरियाँ से ज़ो मिल जाये वों सरिता मैं हूँ…. दूर चला गया तू मुझसे कई दफ़ा, हर बार लौटने की उम्मीद सें किया गया इंतज़ार मैं हूँ…. गलतफहमी कभी गलती से आ भी जाये अगर, बावजूद उसके सागर से जो मिल जाये वो साहिल मैं हूँ…. चाहकर कभीं चुप रहना पड़ा किसी पल मैं, तेरे कलम की स्याहीं सें जो निकले वो ...

मेरा हिस्सा बना ही नहीं

वो था मेरे जिंदगी का सबसे महत्त्वपूर्ण कीरदार आया, सबसे ज्यादा हक़ भी जताया और आँखों से ओझल हो गया कही किस पार मैं खुदको ढूँढती रही उसमे पर अफ़सोस हुआ जानकर की अब रहीं ना मैं कोई हक़दार मेरी कहानी का हिस्सा भी वही हर पन्ने पे जो छप गया वो क़िस्सा भी वही चाहकर भी अलग कर ना सकु ऐसा रिश्ता भी वही मेरा हिस्सा होकर भी वो शख़्स मेरे हिस्सा बना ही नहीं _निधि १४/०७/२०२३ रात १०:०२

तोहफा

हमने उन्हे तोहफ़े में, अपना अपना अच्छा वक्त दे दिया उस तोहफ़े ने उनका वक्त ही बदल दिया तोहफ़े में मिले अच्छे वक्त में वो कुछ इस तरह गुम हो गए की अब उनके पास हमारे लिए देने के लिए वक्त ही ना रहा... अच्छे वक्त को संभाल के रखिए... तोहफ़े में भी न दे क्या पता कल यही वक्त आपके लिए बुरे वक्त का तोहफ़ा लेकर आए। _निधि १ जून २०२२

अलविदा!!!

आज फिर उनसे बात हुई, मगर इस बार एक दोस्त बनकर नहीं... बस अजनबी बनकर.. थोड़ा बुरा लगा!! इस तरह खुदको झुठलाकर.. पर मजबूर भी उन्ही ने किया था.. मैं "कैसे हो" कहकर रूक गई, जवाब में "ठीक नहीं हूं!!" सुनकर दिलसे दुख हुआ.. पर बात को अनसुना कर बात को खत्म कर दिया.. सच कहूं तो उसने जो नही कहा, वह भी सुन लिया था मैंने.. क्यूकी, में उसकी रूह को पहचानती हूं.. वो चाहे या ना चाहे मुझे, माने या ना माने, पास रहे या दूर, फिर भी उसको सुन सकती हूं, महसूस कर सकती हूं... उसके दुखी होने पर मेरा दिल आज भी रोता है.. उसे खुश देखकर में भी खिलखिलाती हूं.. न जाने कोन हूं मैं उसकी??? पर कुछ हूं जरूर!! तभी तो, आपने आने की खबर दे चुका था... पर मजबूरियों के कटघरे में खड़ा भी वही कर कर गया.. बुलाकर भी नही बुलाना समझ गई थी में.. मैंने भी खबर जानकर, मिलूंगी दिखाया, पर मिली नही... क्यूकी, उसकी खुशी इसी में थी!! और मेरी उसमे!! न जाने और कितने अलविदा कहने पड़ेंगे?? बस उसकी खुशी के लिए... न जाने और कितने बार मरकर भी जीना पड़ेगा?? बस उसकी हसी के लिए... _निधि ६ जून २०२२

उलझन

जिंदगी के उस मोड़ पे हूं जहां मैं सबके साथ होकर भी कभी कभी अकेला महसूस करती हूं अपनो को सहारा देते देते खुद सहारा ढूंढना जैसे भूल ही गई हूं कभी रोने का मन होकर भी हसीं के पीछे छिपाती हूं कभी बेवजह ही खुदपे गुस्सा आता है जिंदगी क्या मोड़ लेगी ये सोचके आजकल डर लगता है इन दिनों बोहोत अजनबियों से मिलने का मौका मिला मिलकर लगा की जिंदगी इतनी भी बुरी नहीं है ये सच को अपनाने ही वाली थी की किसी ने मेरा दरवाजा खटखटाया मैंने भी सावधानी से झांक कर देखा देखा तो क्या था _ पुराने अच्छे पलो की कुछ बुरी यादें में समझ ही नहीं पायी क्या करू यादें बुरी जरूर है , पर पल तो हसीन थे उन्हें आंचल में समेट कर रखूं या फिर लौट जाने को कहूं मेरी बात मानेंगे क्या ?? ये भी सवाल था मन में और जो आज मेरे सामने है जिस आज में कुछ पल के लिए ही सही पर खुश हूं उसको कहा जगह दू मौका दू भी या नहीं या फिर से वही कहानी दोहरायी जायेगी क्या जिंदगी फिर वही मोड़ लेगी अजीबसी उलझन है _निधि २७/०५/२०२२

संयोग

तुमने कहा था  मुझे तुमसे कोई और अच्छा मिलेगा तुम मेरे लायक नही हो मैं कभी मानती नही थी ना ही अब मानती हूं तुमसे अच्छा तो नही चाहिए था कभी भी पर इतना जरूर मालूम है की अब तुमसा कोई नही चाहिए अब जो मेरे जिंदगी में दस्तक दे रहा है मैं भी अपने कदम उसकी ओर बढ़ाना चाहती हूं और यह मेरी मजबूरी नहीं है मैं दिलसे उसकी ओर आगे बढ़ना चाहती हू क्यूकी तुमने जहा मेरा साथ निभाना छोड़ दिया उस राह पर उसने मेरा हाथ थामा है जहा में बिखर गई वहां उसने मुझे समेटा है जहा तुम्हे कमियां और खामियां नजर आई मुझमें उसने वही मुझे  उन खामियों के साथ स्वीकारा है क्युकी  वो मुझे समझता है वो अनजान होकर मुझे अपना मानता है और तुम जानकर भी अनजान बन गए जिंदगी भर साथ निभाना पढ़ाई करने और पैसे कमाने जितना आसान भी नहीं है हर चीज दिमाग से खरीदने के लिए नहीं होती रिश्ते जोड़ने पड़ते है और उन्हें निभाया जाता है ख़ैर तुमसे ये बात भी करना  गलत है पर तुम्हे बताते हुए खुशी हो रही है की अब मुझे तुम्हारी याद नही आती में तुम्हारा इंतजार भी नही करती क्योंकि मेरे इंतजार में अब कोई और आने लगा है अब में पहलेसे ज्यादा खुश रह...

हार- जीत

जिनके साथ कभी कोई लढ़ाई नही करनी चाही वो लोग आज मुझे हराने में लगे है वो हर प्रयास कर रहे हैं मुझे मुझसे ही हराने का उनको ये बता दू की अपना कीमती वक्त ज़ाया ना करे किसी की पराजय में खुद की जीत खोजना  खुद अपने आप में सबसे बड़ी हार हैं मुझे खुशी है कि मेरी हार से ही सही किसीको खुशी तो मिली मैंने खुद ही अपने कदम पिछे लिए है उस लड़ाई से, जो जंग न कभी मैंने छेड़ी थी ना कभी जितने का सपना देखा अपनो को हराकर जितने वालो में से नही हूं मैं मैं हूं मेरा अस्तित्व है था और रहेगा उसे मिटाने की उसे बदलकर कुछ और रूप देनेकी या उसे कमज़ोर करने की कोशिश ना करे यदि आप मेरे अस्तित्व को अपने जिंदगी से नही मिटा पा रहे तो यह प्रयास विफल होगा  अगर आप सोचते है की मुझे ही मिटाने से आपको सफलता मिलेगी जरा सोचिएगा ज़रूर _निधि