आजाद है तू
आज़ाद है तू
अब रोज रोज ये हवाएं नहीं आएगी
तुझे अपना समझकर अपने गीत नहीं सुनाएगी
मौसम भी बदलेंगे तेरे
अब हर दिन एक नई सुबह होगी
जो नए तराने लाएगी
आजाद है तू
ऊंचाईयों को छूने के लिए
अब किसी अनजाने की परछाई तुझे ज़मीन पर ना रोक पाएगी
तू चंचल सा होकर खुल कर जीना
अब कोई पायल की धुन तेरे कानों तक ना पहुंच पाएगी
आज़ाद है तू
खुशियों को अपनी मुट्ठी में भरने के लिए जिनका तू हकदार है
अब कोई पुरानी ग़ज़ल लबो पे नहीं आएगी
आगे बढ़ना तू साहिल होकर
अब नदियां सागर की मन्नत के बिना लहरों से नहीं टकराएगी
आज़ाद है तू
सजाना तेरी दुनिया को अपने सपनों के रंगों से
अब कोई होली अपना रंग तुझपे नहीं चढ़ाएगी
हर दिन खुशियों की दीवाली मनाना तू
अब कोई बीती रात उम्मीदों के दीप नहीं जलाएगी
आज़ाद है तू
मन मस्त होकर इठलाने के लिए
गैरो से भी उलझने कम होगी अब
कोई खुदसे ज्यादा अब तुझमें नहीं उलझ पाएगी
बंद कर देना दिल के झरोखों को
तेरी चाहत के बिना अब कोई रोशनी तेरे आंगन में दस्तक देने से कतराएगी
नाही ये बेमौसम बरसात तुझे भिगाएगी
आज़ाद है तू फिर एकबार
अब कोई अनजान चिड़िया तेरे बसेरे में नहीं आएगी
कोई अनजान चिड़िया तेरे बसेरे में नहीं आएगी
_Nidhi$

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