दोस्त

दोस्त और दोस्तो की दोस्ती
शब्दों से परे है
ज़िन्दगी  की हर राह पर
ये यार ही तो है जो खरे है
लाख गीले शिकवे हो आपस में भले ही
कोई पत्थर उछाले यार पे,ये दोस्त उछालनेवाले के लिए सबसे बुरे है
चाहे दूर हो या पास
हर लम्हे में इनके होने का एहसास
दुख में दुखी तो सुख में मिठास
ऐसे दो रत्न मेरे भी है
हम बिछड़ गए थे फिर मिलने के लिए
पर आज  मिलो दूर हमारे सवेरे है
ऐसे कुछ खास दोस्त मेरे भी है
बचपन के वो मासूम दोस्त और खट्टी मीठी शरारतें
आज भी मेरे आने की खबर मिलते ही मेरी राह निहारते
फूलो सी कोमल पहली दोस्त को पाया
आज तक हर कदम जिसने साथ निभाया
जीत ना सके जिसे नाम है जय
दोस्ती निभाए बिल्कुल जैसे सुर ताल और लय
है एक दोस्त सूर्यकांत  नवाब
दुनिया घूमने में नहीं है इनका जवाब
बच्चो से चंचल पूर्व की प्राची हमारी बच्ची
विख्यात है जगत में दोस्तो कि सच्ची
आती है बारी
जो नहीं कभी है हारी
संभाला जिसने हमेशा नाम है पुजा
अब मैं तेरी मुसीबत हूंऔर कोई न दूजा
मोहोर लगाई दोस्ती पे अपने नाम की ऐसी अंकिता
दोस्ती के तुकबंदी की चोटी सी कविता।
तुकबंदी से ना जोड़ पाई है कुछ ऐसे नाम
ऐसे दोस्तों की  दोस्ती को भी सलाम!!

_Nidhi$


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