संकल्पना




प्यार एक मीठा एहसास है
हर किसी को नहीं होता
ना हर किसी के लिए होता है
जो इस शब्द की गहराई को समझ गया
वो प्यार से वंचित हो जाता है
यही दुनिया की नई रित है
कलयुग में तो प्रेम के अर्थ को बदल दिया है
इसके मायने बदल गए है
और क्यू न हो
लोग जो बदल रहे है
आज तो हर किसी को हर किसी से
थोड़े पल का प्यार हो जाता है
पर ये वो स्नेह नहीं जो हम
हमारी ज़िन्दगी बिताने के लिए ढूंढ़ रहे होते हैं
भावनाहीन लोग आज प्यार कि परिभाषा करते है
किन्तु ये नहीं समझते उनके इस खेल में
किसी की भावनाओं के साथ खिलवाड़ हो रहा है
मतलब के लिए जो करे वो प्रेम नहीं महज दिखावा है
प्रेम तो वो है जिसमें समर्पण
एक दूसरे के प्रति आदर
एक दूसरे के सपनों को पूरा करने की चाह
दूसरे की खुशी के लिए त्याग
कलह होने पर रिश्तों को टिकने के लिए झुकना
और एक दूजे से अंत ना हो इतना स्नेह
रिश्तों को अटूट रखने की क्षमता है इस एहसास में
पर आज लोग इस प्यारे एहसास को लेकर अलग हो रहे हैं
चिंता का विषय है
यदि यही चलता रहा तो
जो दुनिया प्यार पे टिकी हैं उसका अंत निकट है...निश्चित है

_Nidhi_$

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