उम्मीद
हर दिन उठते ही एक उम्मीद जागती हैं
आज वो मुझे याद करेगा
दिन गुजरता है
पर उसकी याद नहीं
दिन ढल जाता है इस एक उम्मीद के साथ
काम की व्यस्तता के चलते भूल गया होगा
रात में नम पलके बन्द होती हैं
फिर एक उम्मीद के साथ
की कल ज़रूर याद करेगा
ये सिलसिला जारी है
ना अंत है
ना शुरुवात
केवल भावनाओ का चकरव्यूह है
जिसकी गहराई में मै दिन ब दिन डुबती जा रही हूं
अंत को खोजने
अपने भीतर की प्रेम भावनाओ को सुखद अंजाम देने
अपने इंतज़ार को पूर्ण विराम लगाने।
_Nidhi_$

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